इतिहास / History

सेंट मैरी कैथेड्रल चर्च /St Mary's Cathedral Church

 

 

सेंट ल्यूक चर्च /St Luke Church

जालंधर छावनी भारत के सबसे पुरानी छावनियों में से एक है|  प्रथम एंग्लो सिख युद्ध के बाद, जब ब्रिटिश उत्तर भारत में बसे, तब इसकी नीव सन 1848 ई. में रखी गई| इस छावनी का मूल उद्येश्य सैनिकों की शांति और व्यवस्था के रखरखाव के लिए एवं आसपास के राज्यों से गड़बड़ी को दबाने तक सीमित थी| जालंधर छावनी के पास परंपरागत जालंधर गैरिसन है| इसका इतिहास हमें सन 1865 ई. में ले जाता है जब इसको जालंधर गैरीसन  के रूप में कर्नल जे.एन. बिशप द्वारा उठाया गया था| मेजर जनरल जे. ए. एच. पोलक के आदेशानुसार, सन 1904 ई. में  इसे जालंधर ब्रिगेड के नाम से नामित किया गया| कुख्यात जलियाँवाला बाग प्रकरण के जनरल आर. इ. एच. डायर ने सन 1917 ई. से 1919 ई. तक यहाँ शासन  किया| पहला भारतीय कमांडर ब्रिगेडियर लखविंदर सिंह, ऍम.बी.ई. बने जिन्होंने ब्रिगेडियर आर.सी.बी. ब्रिस्टो से सन 1947 ई. में पदभार संभाला| ब्रिटिश प्रस्थान और अंततः भारत विभाजन ने छावनी का रूप बदल दिया| इसका महत्व और भी बढ़ गया जब इसकी निकटता, विभाजन के बाद, पाकिस्तान से बढ़ी|
Jalandhar Cantonment is one of the oldest Cantonments in India, the foundation of which was started in 1848 after the first Anglo Sikh war when the British settled in North India. The original scope of this Cantonment was limited to troops to quell disturbances from adjoining states for the maintenance of peace and order. Jalandhar Cantonment has traditionally housed Jalandhar Garrison. Its history dates back to 1865 when it was raised as Jalandhar Garrison by Colonel J.N. Bishop. In 1904, it was re-designated as Jalandhar Brigade under the command of Major Gen. JAH Pollock. Gen. REH Dyer of the notorious Jalianwala Bagh episode commanded it from 1917 to 1919. The first Indian Commander was Brig. Lakhwinder Singh, MBE who took over from Brig. RCB Bristow, OBE in 1947. The departure of British from India and subsequent partition of the country changed the complexion of the Cantonment. It has gained tremendous importance on account of its proximity to the border with Pakistan.

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